आगामी सौ दिनों में दिल्ली, कोच्चि और नागपुर में 21 किलोमीटर लंबी मेट्रो (Metro) लाइनों का निर्माण किया जाएगा।
देश के 27 शहरों में लगभग 900 किलोमीटर लंबी नई मेट्रो(Metro) रेल निर्माणाधीन हैं।
तीन मेट्रो (Metro) लाइन निम्नलिखित हैं:
- 5.6 किलोमीटर लंबी, महाराजा कॉलेज से थाइकोडैम तक, कोच्चि मेट्रो(Metro)
- 4.3 किलोमीटर लंबी, द्वारका से नजफगढ़ तक, दिल्ली मेट्रो(Metro)
- 11 किलोमीटर लंबी, लोकमान्य नगर से सीताबुल्दी तक, नागपुर मेट्रो (Metro)।
मई, 2014 तक देश भर में सात शहरों (कोलकाता, दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम, बेंगलुरू और मुम्बई में लगभग 247 किलोमीटर लंबी मेट्रो (Metro) रेल का परिचालन शुरू किया गया था।
अब 18 शहर यथा दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद, बल्लभगढ़, बहादुरगढ़, जयपुर, लखनऊ, कलकत्ता, अहमदाबाद, मुम्बई, नागपुर, हैदराबाद, बेंगलुरू, चेन्नई और कोच्चि में 657 किलोमीटर लंबी मेट्रो (Metro) रेल का परिचालन शुरू हो जाएगा।
100 दिवसीय कार्य योजना:
मंत्रालय द्वारा 15 जुलाई, 2019 को ‘मेट्रोलाइट’ नामक हल्की शहरी रेल पारगमन प्रणाली के लिए मानक जारी किए गए।
यह प्रति घंटे प्रति दिशा अधिकतम 15000 यात्रियों की आवाजाही वाले शहरों के लिए उपयुक्त है।
राज्य सरकारों से आग्रह किया गया है कि वे छोटे शहरों में जन परिवहन के प्रमुख साधन के रूप में मेट्रो (Metro) लाइट को अपनाएं। इसकी निर्माण लागत अत्यंत कम है (ज्यादा क्षमता वाली मेट्रो प्रणाली की एलिवेटेड संरचना की निर्माण लागत का लगभग 50 प्रतिशत और भूमिगत संरचना की निर्माण लागत का 20 प्रतिशत)।
इस प्रणाली के निर्माण में अत्यंत कम लागत आने के साथ-साथ इसकी परिचालन व रख-रखाव लागत भी काफी कम होने के कारण यह अत्यंत लाभप्रद एवं टिकाऊ है।
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